पृष्ठ

शनिवार, 2 जून 2012

जो खुश दिखता है...


जो खुश दिखता है

जरूरी नहीं,

कि वह खुश हो ही ;

खुशी ओढ़ी भी तो जा सकती है !

ठीक वैसे ही

जैसे अपने देश के

करोड़ों भूखे , नंगे लोग

पेट की आग बुझाने की असफल कोशिश में

जिंदगी  की चक्की में

पिसे जा रहें हैं

फिर भी

{ खुशी से ?}

जिए जा रहे हैं !



अभाव और दुःखो के

गहन अंधकार में

सुख और साधनों की

एक क्षीण- सी लौ का भी सहारा नहीं है

उनके जीवन में

फिर भी;

करोड़ों पथराई ऑंखों में

ऑंसुओं को बेदखल करते हुए

न जाने कौन से

सुनहरे भविष्य के सपने तैर रहे हैं

जिन्हें पाने की मृग-मरीचिका में

वे घिसटते हुए दौड़ रहे हैं

सिसकते हुए हॅंस रहे हैं

और मरते हुए जी रहे हैं |





जवानी में ही झुर्रियों भरे

असंख्य दयनीय चेहरों पर

चिपकी हुई बेजान मुस्कुराहटें देखकर

मेरा यह विश्वास लगातार गहराता जा रहा है

कि जो खुश दिखता है

जरूरी नहीं ,

कि वह खुश हो ही ;

खुशी ओढ़ी भी तो जा सकती है !

                                                         --उत्तरी शकुन नगर,

                                                           फतेहपुर - उ0प्र0


                                                           दूरभाष- 9336453835

मंगलवार, 22 मई 2012

कुत्तों से सावधान

मैं गया एक  दिन  
अपने एक  परिचित  के घर 
उसके  बड़े - से गेट पर 
जहाँ लिखा  होना चाहिए था स्वागतम 
वहाँ  बड़े-बड़े अक्षरों में 
लिखा मिला -
" कुत्तों से सावधान " ।

मैंने कहा अपने आप  से 
चलो भाई  !
कहाँ आ  गए यहाँ ?

लगता है -
यहाँ तो सिर्फ  कुत्ते ही रहते हैं 
तभी तो लिखा है 
कुत्तों से सावधान  !